Working Teachers Special TET Update: देश में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किया गया है। हाल ही में शीर्ष न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद यह विषय एक बार फिर चर्चा में आ गया है। विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए, जो लंबे समय से सेवा में कार्यरत हैं लेकिन अब तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं कर सके हैं, यह फैसला महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। इसी क्रम में तमिलनाडु सरकार ने कार्यरत शिक्षकों को राहत देने के लिए स्पेशल टीईटी आयोजित करने और पासिंग मार्क्स में छूट देने का निर्णय लिया है।
प्राइमरी शिक्षकों के लिए टीईटी क्यों हुआ अनिवार्य?
न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। बच्चों के भविष्य से जुड़ा मामला होने के कारण यह आवश्यक है कि स्कूलों में केवल योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक ही नियुक्त हों। इसी उद्देश्य से प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया है।
निर्देशों के अनुसार, शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों को भी निर्धारित समय सीमा के भीतर टीईटी पास करना होगा। उन्हें दो वर्ष की अवधि दी गई है ताकि वे परीक्षा की तैयारी कर सकें और आवश्यक योग्यता प्राप्त कर सकें। यह कदम शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में उठाया गया है।
हालांकि न्यायालय ने कुछ विशेष परिस्थितियों में राहत भी दी है। जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पाँच वर्ष से कम समय शेष है, उन्हें टीईटी पास करने की अनिवार्यता से आंशिक छूट दी गई है। लेकिन यदि ऐसे शिक्षक पदोन्नति प्राप्त करना चाहते हैं, तो उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। यानी प्रमोशन के लिए पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना जरूरी रहेगा।
तमिलनाडु सरकार की पहल: स्पेशल टीईटी का निर्णय
न्यायालय के आदेश के बाद कई राज्यों में कार्यरत शिक्षकों के बीच चिंता का माहौल बन गया था। ऐसे में तमिलनाडु सरकार ने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए स्पेशल टीईटी आयोजित करने की घोषणा की। यह कदम विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए राहत लेकर आया है, जो वर्षों से पढ़ा रहे हैं लेकिन परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सके हैं।
स्पेशल टीईटी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवा में कार्यरत शिक्षक अपनी नौकरी बरकरार रखते हुए परीक्षा पास कर सकें। इसके साथ ही सरकार ने पासिंग मार्क्स में भी महत्वपूर्ण छूट देने का निर्णय लिया है। इससे बड़ी संख्या में शिक्षकों को फायदा मिलने की संभावना है।
पासिंग मार्क्स में दी गई विशेष छूट
स्पेशल टीईटी के लिए जारी अधिसूचना के अनुसार सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 50 प्रतिशत रखी गई है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षकों के लिए पासिंग मार्क्स को घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है।
यह छूट इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पहले सभी वर्गों के लिए पासिंग मानक अपेक्षाकृत अधिक थे। अब वर्गवार छूट मिलने से उन शिक्षकों को लाभ होगा, जो थोड़े अंतर से परीक्षा में असफल हो जाते थे। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षक परीक्षा उत्तीर्ण कर सकेंगे।
परीक्षा अवधि में भी किया गया बदलाव
केवल पासिंग मार्क्स में ही नहीं, बल्कि परीक्षा की अवधि में भी बदलाव किया गया है। अब अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए तीन घंटे का समय दिया जाएगा। इससे शिक्षकों को पेपर को ध्यानपूर्वक पढ़ने और सोच-समझकर उत्तर देने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। यह निर्णय उन शिक्षकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा, जिन्हें लंबे समय बाद प्रतियोगी परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
इन-सर्विस शिक्षकों के लिए क्यों है यह राहत अहम?
कई शिक्षक वर्षों से विद्यालयों में कार्यरत हैं और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे रहे हैं। लेकिन किसी कारणवश वे टीईटी परीक्षा पास नहीं कर सके। ऐसे शिक्षकों के सामने नौकरी की अनिश्चितता का खतरा उत्पन्न हो गया था। स्पेशल टीईटी और पासिंग मार्क्स में छूट से उन्हें अपनी सेवा जारी रखने का अवसर मिलेगा।
यह भी देखा गया है कि अनुभव और व्यवहारिक ज्ञान रखने वाले शिक्षक कई बार लिखित परीक्षा में अपेक्षित अंक प्राप्त नहीं कर पाते। इसलिए सरकार ने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए यह विशेष व्यवस्था लागू की है। इससे शिक्षा व्यवस्था में संतुलन बना रहेगा और अनुभवी शिक्षकों का योगदान भी जारी रहेगा।
उत्तर प्रदेश के शिक्षकों की बढ़ी उम्मीदें
तमिलनाडु के इस निर्णय का असर अन्य राज्यों पर भी पड़ रहा है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जो 2011 से पहले नियुक्त हुए थे और अब तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं कर पाए हैं। अनुमान है कि ऐसे शिक्षकों की संख्या लगभग दो लाख के आसपास है।
तमिलनाडु की पहल के बाद उत्तर प्रदेश के शिक्षकों में भी उम्मीद जगी है कि राज्य सरकार इसी प्रकार का कदम उठा सकती है। यदि पासिंग मार्क्स में छूट या स्पेशल टीईटी की व्यवस्था लागू होती है, तो बड़ी संख्या में शिक्षक पात्रता परीक्षा पास कर सकेंगे।
हालांकि राज्य सरकार ने इस विषय में पुनर्विचार याचिका दायर की हुई है और अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है। इस बीच शिक्षक संगठनों की ओर से टीईटी से पूर्ण छूट देने की मांग भी की जा रही है। आने वाले समय में न्यायालय और राज्य सरकारों के निर्णय पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षक हितों के बीच संतुलन
पूरे मामले का मूल उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना है। योग्य शिक्षक ही विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा दे सकते हैं। लेकिन साथ ही यह भी आवश्यक है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों की अनदेखी न हो। तमिलनाडु सरकार द्वारा उठाया गया कदम इसी संतुलन का उदाहरण माना जा रहा है।
स्पेशल टीईटी और पासिंग मार्क्स में छूट से जहां एक ओर न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को भी उचित अवसर मिलेगा। यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है।
आखिरकार, शिक्षा व्यवस्था की मजबूती तभी संभव है जब योग्य शिक्षक और व्यावहारिक अनुभव दोनों का समन्वय हो। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य राज्य भी इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं और कार्यरत शिक्षकों को किस प्रकार राहत प्रदान की जाती है।













