Weather Update 25 February: देशभर में मौसम एक बार फिर करवट लेने की तैयारी में है। बीते कुछ दिनों से उत्तर और पश्चिम भारत में शुष्क मौसम का प्रभाव देखा जा रहा था, लेकिन अब पूर्वी, मध्य और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ जाने के बाद फिलहाल उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम साफ बना हुआ है, जबकि बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाएं और उत्तर-पश्चिम से आने वाली शुष्क हवाओं के मेल से पूर्वी और मध्य राज्यों में बादल सक्रिय हो रहे हैं। 23 से 25 फरवरी के बीच कई राज्यों में मेघ गर्जना के साथ हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की जा सकती है।
उत्तर और पश्चिम भारत में खत्म होती सर्दी
दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान समेत उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में अब ठंड लगभग विदा ले चुकी है। सुबह और शाम हल्की ठंडक जरूर महसूस हो रही है, लेकिन दिन के समय तेज धूप के कारण तापमान में बढ़ोतरी देखी जा रही है। साफ आसमान और शुष्क हवाओं के चलते दिन के तापमान में लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे लोगों को दोपहर में हल्की गर्मी का एहसास होने लगा है।
हालांकि 22 फरवरी के आसपास पहाड़ी क्षेत्रों में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के पहुंचने की संभावना जताई गई है, लेकिन इसका प्रभाव मुख्य रूप से ऊंचाई वाले इलाकों तक सीमित रहने की उम्मीद है। मैदानी क्षेत्रों में इसका खास असर नहीं दिखाई देगा। हिमालयी क्षेत्रों में हल्के बादल छा सकते हैं, परंतु व्यापक वर्षा की संभावना कम है।
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राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में तापमान बढ़ने से फसलों पर पड़ने वाले पाले का खतरा काफी हद तक कम हो गया है। किसानों के लिए यह राहत की बात है, क्योंकि अत्यधिक ठंड से रबी फसलों को नुकसान होने की आशंका बनी रहती है। अब मौसम के सामान्य होने से गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलों को बेहतर बढ़वार मिल सकती है।
मध्य भारत में बदलता मौसम, ओलावृष्टि की आशंका
मध्य भारत के कुछ हिस्सों में मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मध्य प्रदेश के पूर्वी जिलों जैसे सीधी, सिंगरौली और रीवा में हल्की वर्षा के आसार बन रहे हैं। आसमान में बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर कहीं-कहीं तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
22 फरवरी से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के कई जिलों में बादलों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग में 23 और 24 फरवरी के दौरान तेज हवाओं के साथ वर्षा हो सकती है। कुछ इलाकों में मेघ गर्जना और बिजली चमकने की घटनाएं भी देखने को मिल सकती हैं। यदि बादल अधिक सक्रिय हुए तो सीमित क्षेत्रों में ओलावृष्टि की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
खड़ी फसलों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। विशेष रूप से सब्जियों और दलहन की फसलें तेज हवाओं और ओलों से प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम के ताजा अपडेट पर नजर रखें और अपनी उपज को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
पूर्वी भारत में गरज के साथ बारिश
पूर्वी भारत के राज्यों में भी आने वाले दिनों में मौसम सक्रिय रहेगा। झारखंड के दक्षिणी हिस्सों जैसे रांची, खूंटी और जमशेदपुर में बादल छाने और हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है। 23 और 24 फरवरी को यहां गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
बिहार के दक्षिणी जिलों, जिनमें गया और औरंगाबाद प्रमुख हैं, में भी 23 फरवरी के आसपास बादलों की आवाजाही बढ़ेगी। कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। दिन के तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की जा सकती है, जबकि आर्द्रता बढ़ने से मौसम में हल्की उमस भी महसूस हो सकती है।
ओडिशा में भी कई जिलों में गरज के साथ बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी इन क्षेत्रों में बादलों को सक्रिय कर रही है, जिससे मौसम में यह परिवर्तन देखा जा रहा है। तटीय क्षेत्रों में हवाओं की रफ्तार थोड़ी तेज रह सकती है।
दक्षिण भारत में सक्रिय होगा वर्षा क्षेत्र
दक्षिण भारत में भी आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। तमिलनाडु और केरल के दक्षिणी भागों में अगले दो से तीन दिनों के दौरान अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा भी दर्ज की जा सकती है।
दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, जिसमें बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं, में 21 और 22 फरवरी को हल्की बौछारें पड़ने के आसार हैं। बादल छाए रहने से दिन का तापमान सामान्य से थोड़ा कम रह सकता है। मौसम में नमी बढ़ने से हल्की ठंडक का एहसास हो सकता है।
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद और आसपास के जिलों में 23 फरवरी को रुक-रुक कर वर्षा होने की संभावना है। गरज-चमक के साथ कुछ स्थानों पर तेज बौछारें पड़ सकती हैं। हालांकि व्यापक और लंबी अवधि की बारिश की संभावना कम है, फिर भी मौसम में अस्थिरता बनी रह सकती है।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिणी हिस्सों में भी भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। यहां समुद्री हवाओं के प्रभाव से बादल अधिक सक्रिय हो सकते हैं। मछुआरों और समुद्र में जाने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
किसानों और आम लोगों के लिए सावधानी जरूरी
मौसम के इस उतार-चढ़ाव का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। जहां एक ओर कुछ क्षेत्रों में तापमान बढ़ने से फसलों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर अचानक बारिश और संभावित ओलावृष्टि से नुकसान की आशंका भी बनी हुई है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर फसलों को ढकने या सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था करें।
शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी बदलते मौसम के अनुसार अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। दिन में बढ़ती गर्मी और शाम की हल्की ठंडक के कारण सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यात्रा करने वालों को भी मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही योजना बनानी चाहिए।
कुल मिलाकर, 23 से 25 फरवरी के बीच देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आएगा। कहीं धूप और बढ़ता तापमान रहेगा तो कहीं बादल, बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। ऐसे में सतर्कता और समय पर तैयारी ही किसी भी संभावित नुकसान से बचाव का सबसे बेहतर उपाय है।











